चाह नहीं मैं फ़िल्मी सुन्दरियों के
कपड़ो पे थूका जाऊँ
चाह नहीं, युवा मस्तिस्क में
घुस पप्पू की बुद्धि खा जाऊ
चाह नहीं, मीडिया के
सौदों में सच्चाई का खून कर जाऊ
चाह नहीं, जनरल केटेगरी के करियर पर
चढ़ूँ भाग्य गटक कर इठलाऊँ
चाह नही मैं संसद की कुर्सियों
पर भ्रसटाचार की फाइलें चट कर जाऊ
मुझे अनजनी में ले कर, हे मनुपुत्र !
संसद पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि का शीश झुकाने
जिस पर जावें नेता अनेक ।।
This poem is inspired by पुष्प की अभिलाषा written by श्री माखनलाल चतुर्वेदी (Shree Makhanlal Chaturvedi) and epic Shingvi Termites episode.
कपड़ो पे थूका जाऊँ
चाह नहीं, युवा मस्तिस्क में
घुस पप्पू की बुद्धि खा जाऊ
चाह नहीं, मीडिया के
सौदों में सच्चाई का खून कर जाऊ
चाह नहीं, जनरल केटेगरी के करियर पर
चढ़ूँ भाग्य गटक कर इठलाऊँ
चाह नही मैं संसद की कुर्सियों
पर भ्रसटाचार की फाइलें चट कर जाऊ
मुझे अनजनी में ले कर, हे मनुपुत्र !
संसद पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि का शीश झुकाने
जिस पर जावें नेता अनेक ।।
This poem is inspired by पुष्प की अभिलाषा written by श्री माखनलाल चतुर्वेदी (Shree Makhanlal Chaturvedi) and epic Shingvi Termites episode.
ROFL
ReplyDeleteGlad you liked it.
DeleteAwesome Punditji :D
ReplyDeleteZabardast !!!
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