Today I saw the image of the man who was stopping me from becoming a better person. He was stopping me from getting better health, wealth and social status. I really hate that only man. He is biggest weakness. He encouraged me to remain lazy and a schizophrenic. He is the one who made me to become a disappointment for my parents. He trapped me into the web of intoxication. I want to kill that person and I really want him to punch on his face. I was so angry that I hit his picture with my fist and then the mirror broke ...
Saturday, 27 December 2014
Wednesday, 26 November 2014
Why we must remain away from e shopping ?
It's not a very intelligent decision to buy electronics from outside India or Exclusive e commerce sites. Here are the reasons why ...
Any smartphone is like an investment. You pay around 10 to 50k for this luxury. We buy phones after seeing looks, features and price. If anyone is too concered, he will look for warranty. But is it sufficient ? What about after sales service ? I recentlu bought one phone from #Flipkart made by #Asus. Features were awesome, I got a phone powered by Intel Processor with 2GB ram that too for 9,999. Nice deal, ah . Phone worked well and recently the fell from my hand and now it's screen is broken. As most of the mobile phone manufacturer #Asus also dont take mobile phone's screen in warranty. When I asked for paid replacement they said it will cost around Rs4,800. So just for changing the screen of a Rs 9,999.00 phone I have to spend an amount which is just half of the selling price. Then I went to the local mechanis looking for it's screen but they said they have not heard of the name of the company. Had it been any renowned old company phone I would have easily got the screen maximum by Rs 2000. Now I dnt want to throw my new phone but I cant use it either. Getting it repaired is not sounding wise. Feeling like trapped in the net of e commerce shopping.
I also bought one external Hard Disk made by #Transcend from #Snapdeal. It was a cool 1 TB hard disk but just in one month it got crashed and couldn't be detected by PC. All important data is lost. I went Nehru place looking for warranty but the googled address was wrong. Person sitting at helpdesk said they dont provide service for Transcend customer anymore. When I inquired about the new service center he said he dont have any idea about it. #Transcend neither has any section called Service center on its now it has any address of the service centers in Delhion its website.
Finally I am Feeling like being cheated. All my data lost, time lost and my hard earned money lost and I cant do anything about it.
Tuesday, 11 November 2014
दीमक की अभिलाषा
कपड़ो पे थूका जाऊँ
चाह नहीं, युवा मस्तिस्क में
घुस पप्पू की बुद्धि खा जाऊ
चाह नहीं, मीडिया के
सौदों में सच्चाई का खून कर जाऊ
चाह नहीं, जनरल केटेगरी के करियर पर
चढ़ूँ भाग्य गटक कर इठलाऊँ
चाह नही मैं संसद की कुर्सियों
पर भ्रसटाचार की फाइलें चट कर जाऊ
मुझे अनजनी में ले कर, हे मनुपुत्र !
संसद पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि का शीश झुकाने
जिस पर जावें नेता अनेक ।।
This poem is inspired by पुष्प की अभिलाषा written by श्री माखनलाल चतुर्वेदी (Shree Makhanlal Chaturvedi) and epic Shingvi Termites episode.
राम कि शक्ति पूजा - नाटक क्या देखा क्या समझा ।
राम की शक्ति पूजा ... वैसे तो आज इस नृत्य नाटक और यूँ कहें नृत्यनाट्य रामलीला को देखने का शुभ अवसर हमारे स्कूल के मित्र और सहपाठी श्री राहुल श्रीवास्तव जी के कारन हो पाया । उन्होंने हमें सुबह दस बजे THE HINDU अख़बार की एक कटिंग वेत्सप्प पे भेजी और कहा "चुप चाप आ जइयो " । मित्र की बात टालने की हिम्मत हमारी तो न हो पाई । हमने भी काम पुररकिया और निकल लिए । सच कहूँ तो मैंने निराला जी की कविता पढ़ी नही थी मगर इस नाटक को देखने के बाद मुझे उनकी रचनाओ में और भी दिलचस्पी आई है । इस नाटक को दिखने का मूल उद्देश् निराला के साहित्यिक कार्यो को हिंदी पाठको तक पहुचना था जिसमे आयोजक बहुत हद तक सफल हुए हैं । मैं उनका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ ।
अब आपको कुछ इस नाटक के बारे में बताता हूँ । मैं ना केवल इस नाटक का वर्णन अपने शब्दों में करूँगा किन्तु मैंने खुद को और इस आधुनकि युग के जिस प्रकार से इस नाटक के माध्यम से देखा है उसका भी वर्णन करूँगा । इस नाटक में दिखाया गया है कैसे प्रभु राम रावण से युद्ध करते वक़्त अवसादग्रस्त हो कर निराशा के चरम सीमा पे चले जातें हैं । उन्हें लगता है शक्ति रावण के साथ हैं और वो रावण से कभी विजय नही प्राप्त कर पाएंगे । राम को सीता कि याद खाए जा रही है । प्रियतमा कि कुसलमंगल होने की कामना उन्हें अवसादग्रसित बना रही है । तब विभीषण उन्हें धिकारते हैं के विजय के इतने करीब आकर वो कैसे यूँ हताश हो सकते हैं ? इन सब के बीच जामवंत बुजुर्ग होने के नाते आते हैं और राम को शक्ति की आराधना करने के लिए प्रेरित करते हैं । राम देवी की पूजा अर्चना के लीए 108 नीलकमल देवी को अर्पण करने की कामना करते हैं । हनुमान उनके लिए 108 नीलकमलो की व्वस्था करते हैं । तभी देवी चुपके से आकर एक पुष्प चुरा लेती हैं । राम की पूजा अधूरी रह जाती है वो व्याकुल हो जाते हैं । तब उन्हें याद आता है माँ उन्हें राजीवनयन कहती थी और उनकी आँखों कओ नीलकमल । ये याद आते ही प्रभु अपनी एक आँख निकाल कर देवी को अर्पण करने कि चेस्टा करते हैं और बाण उठा करने आगे बढ़ते हैं । ये देख देवी वहां प्रकट हो जाती हैं और राम को रोक लेती हैं। फिर राम की भक्ति देख देवी राम में समाहित हो जाती हैं । अगर इसे आधुनिक युग के अनुसार देखे तो पाऐंगे ठीक उसी प्रकार जैसे आज के इस आधुनिक युग में बार बार प्रयाश करने पर भी हम जब असफल हो जाते हैं तो निराशा के चंगुल में फस जातें हैं , हमें लगता है जैसे हमारे पास पैसे या ताकत नहीं है और इस वजह से हम अपने परिस्थितियों से जीत नही सकते । तब हमारे करीबी दोस्त हमें धिक्कारते हैं और हमें अपने मंजिल की और आगे बढ़ने का बिन माँगा सुझाव भी देते हैं । तब जामवंत सा कोई बुजुर्ग हमें अपने फैसलो और हमारे कर्मो का विश्लेषण का शुझाव दे कर हमें आलिंगन करता है । हमारे जीवन में जामवंत कोई भी हो सकता चाहे वो शिक्षक हो , माता पिता , पडोसी , भाई , बहिन , दोस्त यार और कोई भी ... जामवंत को सारथि मान हम अर्जुन के भाँती और आगे बढ़ते हैं शक्ति के स्वरूप में समय और सद्बुद्धि कि पूजा अर्चना करते हैं । शक्ति हमारे दृढ़ संकल्प की दृढ़ता कि परीक्षा भी लेती हैं । कड़ी मेहनत और खाटी चाह रखने वालो से ही देवी प्रशन्न होती हैं और यहि लोग देवी कि परीक्षा में उत्तरीरण भी होते हैं और न केवल वो मंजिल को पाते हैं बल्कि मंजिल की राहो को भी भरपूर रूप से आनंदपूर्वक अनुराग सहित अनुभव भी करते हैं ।
इस नाटक में राम को एक स्त्री कलाकार के माध्यम से दिखाना अति मनमोहक था । महिलाओ की इस्थिति देख इस नाटक को देख कर मानो ऐसा लग रहा था मानो शक्ति खुद शक्ति को खुदसे दूर पा रही हो । बाल हनुमान ने मेरा मन मोह लिया था ।
पेश हैं कुछ तस्वीरे ।
Wednesday, 29 October 2014
"नई" साइकिल ।
बात उस समय की है जब मैं 8 या 9 साल का था । चुकी मैं युगपुरुष केजरीवाल की तरह उच्च कोटि की स्मरण शक्ति नही रखता इसलिए 8 या 9 साल ही लिखूंगा । हर बच्चे की तरह मेने भी साइकिल की जिद्द की । चुकी पिताजी एक साधारण पत्रकार थे तो अपने एक मात्र पुत्र के साइकिल की कामना के लिए भी उन्हें 6 महीने से भी ज्यादा सोचना पड़ा । "इम्तेहान मैं अच्छे अंक ले आओगे तो साइकिल आएगी " , "टिंडे खाओगे तो साइकिल आएगी " ऐसी बातें इन 6 महीनो के दौरान बहुत ही आम हो चुकी थी । इम्तेहान में अच्छे अंक लाकर और टिंडे खा कर मैने अपनी इमानदारी का परिचय दिया । अब पिताश्री की बारी थी अपनी बात रखने की ।
अगस्त में जन्मदिन के उपहार में मुझे मिली मेरे जीवन की पहली साइकिल । लाल और बैंगनी रंग की चार पहिये वाली साइकिल । मै और मेरी बहन बारी बारी से उस साइकिल को चलाते थे । कई बार लड़ाई भी होती थी ।
मगर मै उस साइकिल से ज्यादा दिन खुश न रह पाया क्यूंकि मेरे ज्यादातर दोस्तों पे पास ATLAS की बड़ी वाली साइकिल थी । अब मेरी बहन को भरपूर समय मिलने लगा साइकिल पर । वो नकचड़ी तो थी मगर मेरे कलेजे का टुकड़ा भी थी । उससे की हर लड़ाई आज भी मुझे याद है । उससे लड़ाई करना और फिर उसे प्यार से मनाना , और उसका मेरे किसी खिलौने के व्यापार पे ही मानना आज भी एक हसीं याद बन कर मेरे जेहेन में है ।
ख़ैर अब आते हैं साइकिल पर । चूँकि मैने इतनी मशक्कत के बाद ये साइकिल पाई थी तो मै फिरसे अपने परिवार वालो को परेशान नही करना चाहता था । उचित येही समझा कि अब चुप रहने में ही भलाई है।
उस दौरान पिताजी के पास एक दुपहिया वाहन हुआ करता था "बजाज कवाशाकी" CT100 । उसी पर मेरा और मेरी बहन का स्कूल आना जाना हो जाया करता था पिताजी की मदद से । इम्तेहान अभी दूर थे और रविवार को शक्तिमान के साथ मेरी दोपहर मुझे छोटी छोटी मगर मोटी बातें सिखाने लगी थी । सब कुछ ठीक था । अब साइकिल का ख्याल भी मन से निकल चूका था । नवम्बर सामने था और बाल मेल की त्य्कारी जोरो पे थी । तभी एक रोज़ मेरी बहन के क्लास से एक बच्चा आया और कहने लगा "जल्दी चल तेरी बहन को पेट में दर्द हो रहा है , मास्टर साहब बुला रहे हैं । " अब मै कौनसा डॉक्टर था जो मुझे मास्टर ने बुलाया था । ये सवाल आज भी खुदसे पूछता हूँ । ख़ैर पिताजी भी आ चुके थे । हॉस्पिटल जा कर पता लगा प्यारी बहना को Appendix के ऑपरेशन की जरुरत है और उसी वाक्टी 26 हज़ार रूपए चाहिए थे । पिताजी ने आओ देखा न तो अपनी मोटर साइकिल बेच दी । प्यारी बहना का ऑपरेशन हुआ और दर्द से उसे रहत मिली बस पेट पे एक कभी न जाने वाला निशान मिल गया ।
अब स्कूल जाने के लिए हम अपने दोस्तों के साथ जाते 4
थे । ऑपरेशन के वजेह से प्यारी बहना को यूँ पैदल चलने पर मजबूर करना हमारी मज़बूरी थी । तभी पिताजी ने एक साइकिल खरीदी खुद के लिए , और वो भी ATLAS। अब प्यारी बहना साइकिल के कार्रिएर पे बैठ के स्कूल जाती और मै राजा की तरह चल कर । कुछ दिनों बाद मैने भी बड़ी साइकिल को कैची बना के सिख लिया । और प्यारी बहना के साथ खूब घुमाई करने लगा । उसके बाद मैने ठीक से साइकिल चलानी
सीख गया और अगले 4 साल तक हम स्कूल ऐसे ही गए । पिताजी की माली हालत ठीक हो जाने पे प्यारी बहना को भी एक अलग साइकिल मील गई । दोनों साइकिल पे स्कूल जाने लगे और दशवी तक इसे ही गए |
आज इस पोस्ट के पीछे इस तस्वीर का हाथ है । जिसने पुराणी बातें फिरसे नयी करदी । :)
Friday, 1 August 2014
The fight of rights and duties.
Everyday newspapers are fill with news of rapes and riots. People from a certain community are enjoying some extra rights and doing everything that is prohibited under the law under the veil of secularism. Israel is fighting for it's own people. Thanks to it's Iron Dome technology that Israel was able to save its citizens from terrorists attacks. Liberals on twitter were found tweeting "Death to Israel." Hypocrisy died several death day time, I think it committed suicide 100 times also.
This all was happening in the holy month of Ramzan and as soon as Ramzan ended in Srinagar people were seen with ISIS falgs shouting Save Gaza. Really ? Save Gaza and burn Kashmir ? What is more important, your religion or your country ? Your country is giving you employment , freedom, food, security, hope for better tomorrow and what you are giving to your country? Riots ?
We can understand involvement of ISI in Srinagar incident but what happened in Tamil Nadu was more shocking. Few youths, probably belonging to Secular liberal community were found wearing ISIS T-shirts and posing for a camera. Really ? Dude do you even know what does ISIS stands for?
Leave everything aside, whatever is happening in UP has changed my perception about pseudo secularism. The riots in Saharanpur and other parts of the UP is giving an early alarm that this is gonna happen in whole country. The activities in middle east is going to effect India as well and India being a sovereign country should be well prepared to tackle any emergency.
Interestingly those who are demanding for Islamic state, have they ever bothered to notice the plight of Islamic nations like Pakistan, Afghanistan, Iran, Iraq etc ? The religion of peace is turning in religion of piece.
In this dilemma of rights and duties, India must takes it stands for what is better for the the future of India removing all pseudo secular tactics aside.
Thursday, 8 May 2014
Monday, 17 March 2014
Friday, 7 March 2014
अब बस कीजिये नेताजी आम आदमी को कुछ नही चाहिए आपसे और ना ही आपके बाप से .
फिर 26 नवम्बर २०१२ को इंजिनियर बाबु ने एक पार्टी बना डाली | फिर हमारा माथा ठनका और हमने लोकपाल को जानने की कोशिस की | लोकपाल के बारे में जब इन्टरनेट पे पढ़ा तो दंग रह गया | अरे भाई आप भ्रस्टाचार रोकने के लिए एक इतने शक्तिशाली पद का निर्माण करना चाहते है की अगर वो खुद भ्रष्ट हो जाए तो देश में त्राहिमाम मच जाएगा | पॉवर ही तो भ्रस्टाचार की जननी है इस बात को कैसे नकारेंगे आप ? बहरहाल हमने सोचा इंजिनियर बाबु पढ़े लिखे हैं देश का कुछ भला करेंगे | समर्थन जारी रहा |
फिर दिसम्बर २०१२ में कुछ ऐसा हुआ की जिसने पुरे देश को झकझोर के रख दिया | युवा शक्ति , माँत्री शक्ति जाग उठी थी अन्याय के विरुद्ध | दिल्ली जो की बलात्कार की राजधानी बन रही थी हर कोई निर्भया के समर्थन में खड़ा हुआ | लोग जंतर मंतर पहुचे | विरोध हुआ | क्यों हुआ , किसलिए हुआ किसी को कुछ भी नही मालूम था | बरसो से अन्दर आया हुआ गुस्सा अब फूट रहा था | अपनी माँ ,अपनी बहिन , अपनी बेटी , अपनी पत्नी , नारी के लिए सभी आगे आये थे | शीला दीक्षित को भगा दिया गया | अरविन्द बाबु ने इस विरोध को हाईजैक करना चाहा और बहुत हद तक सफल भी रहे | आम आदमी पार्टी के लिए अब हर कोई रजिस्टर होने लगा | युवाओ ने सोचा इंजिनियर बाबु के साथ मिल कर एक नया भारत बनाएँगे |इंजिनियर बाबु के पार्टी समर्थको से जाने अनजाने में एक पुलिस वाले की जान चली गई | जिनको गिरफ्तार किया गया उनके समर्थन में हमने खुद भी ट्वीट किया था | ये रहा उसका साबुत |
इंजिनियर बाबु में हमे एक उम्मीद नजर आ रही थी | सोचा कांग्रेस विरोधी दल एक साथ मिल कर कांग्रेस को उखाड़ फेकेंगे | लग रहा था अब जाती धर्म से ऊपर उठ कर राजनीती होगी मगर ये क्या इंजिनियर बाबु तो सूडो सेक्युलर निकले | इमाम बुखारी के साथ वो मंच पर आये और अब ये साफ़ हो चूका था इंजिनियर बाबु क्या इंजीनियरिंग कर रहे हैं | पहले विरोध प्रदर्शन में भारत माता की तस्वीरे लगती थी और तिरंगा लहरता था मगर सेक्युलर बनने की चाहत में भारत माता की तस्वीरे हटा दी गई | हद तो तब हो गई जब इंजिनियर बाबु ने शहीद मोहनचंद शर्मा की क़ुरबानी का मजाक बना कर रख दिया | उन्हें सहयोगी वकील बाबु आये दिन कश्मीर पर कुछ न कुछ गोबर करते रहते हैं | नक्सल नेताओ के साथ आप के सम्बन्ध तो जय और वीरू जैसा है |
जितना इंजिनियर बाबु के बारे में पढ़ा उतना ही मन विचलित होता गया | फिर भी मन नही माना हमने सोचा इंजिनियर बाबु को कांग्रेस बदनाम कर रही है | तभी अखबारों में श्री अशोक खेमका जी के बारे में पढ़ा | जान कर बहुत दुःख हुआ की उनकी इमानदारी के लिए सरकार उन्हें क्या इनाम में तबादले दे रही है | जब हमने इंजिनियर बाबु के बारे में पढ़ा तो पाया इंजिनियर बाबु तो सियासत के बड़े प्रिय हैं | अपने कार्यकाल में न तो वो कभी दिल्ली से बहार गए हैं और ना ही उनकी धर्म पत्नी | भाई वाह ! कितने ईमानदार रहे होंगे इंजिनियर बाबु इसका अंदाजा अब तो आप सब भी लगा सकते हैं | इंजिनियर बाबु ने लगभग सबको एक्स्पोस किया है मगर आज तक सोनिया गाँधी और उनके परिवार के बारे में कुछ भी बोलने से परहेज करते आये हैं | अपने फायदे के लिए उन्होंने अन्ना और किरण बेदी को भी किनारे कर दिया | इंडिया अगेंस्ट करप्शन अब सियासत की भूखी हो रही थी | मेरा जैसा कॉलेज छात्र भी अब इस बात को समझ सकता था |
दिल्ली में चुनाव हुए | चुनाव से पहले शीला दीक्षित भ्रष्ट थी | चुनाव के बाद और सम्प्रदायित ताकतों को दूर रखने के लिए आपने कांग्रेस के साथ मिल के सरकार बनाई | जो पार्टी चुनाव से पहले भ्रष्ट थी अब कुर्सी के लिए भली हो गई | इंजिनियर बाबु ने इसके लिए भी एक sms का ड्रामा किया | अरे भाई १९८४ के दंगो से घिनोना दंगा कभी हुआ है दिल्ली में ? क्या उन दंन्गो के लिए भाजपा और नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार थे ? भाजपा पर अरविन्द बाबु बहुत कुछ बोलते नज़र आये मगर बड़े चालाकी से उन्होंने कांग्रेस नेताओ पे चुप्पी साध ली | जब पत्रकारों ने सवाल पूछे तो जवाब खांसी में दब गई | उनके साथ अब तो कांग्रेसी समर्थक और भाजपा विरोधी लोग जुड़ने लगे थे | इंजिनियर बाबु ने ऐसे ऐसे वायदे किये की जो उनके "आप" से क्या "बाप" से भी पुरे नही हो सकते थे | मौका देखते ही इंजिनियर बाबु ने इस्तीफ़ा दिया मगर इस बार sms पोलिंग नही हुई | ये सब कुछ देख कर मेरे अन्दर के आम आदमी ने बस इतना कहा बस कीजिये नेताजी आम आदमी को अब आपसे कुछ नही चाहिए | आपने आम आदमी शब्द को राजनीती के नाले में इतना गन्दा कर दिया है की अब कोई हमे आम आदमी कह दे तो आत्मा को कष्ट होता है | आपकी इंजीनियरिंग से तो बहुत कुछ दिख गया जनता को बस अब आप लोक सभा चुनाव में अपनी कांग्रेस रानी के खिलाफ वाले वोट काटेंगे ताकि आपकी मालकिन की सरकार फिर से बने |
आशा है इस बार जनता आपको झाड़ू से बहार कर फेक देगी |
बहुत चुतिया बना लिया आपने अब रास्ता नापिए | हमे बक्शिये !
Monday, 10 February 2014
Narendra Modi exposed !



